जंगलों में 'खाकी' की साठगांठ से सज रहा जुए का अवैध साम्राज्य
ब्याज के दलदल में फँसकर गिरवी रखे जा रहे गहने और वाह
पुलिस की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल
शहडोल(जितेंद्र विश्वकर्मा)। जिले के खैरहा थाना क्षेत्र अंतर्गत जंगलों में इन दिनों अवैध जुए की महफिलें सजी हुई हैं। घने पेड़ों की आड़ और खाकी की कथित खामोशी के बीच बेखौफ तरीके से जुए के बड़े-बड़े फड़ संचालित किए जा रहे हैं। इन फड़ों पर रोजाना लाखों रुपये दांव पर लग रहे हैं। स्थानीय लोगों के अलावा बाहरी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग अपनी किस्मत आजमाने और अपनी जेबें खाली कराने यहाँ पहुँच रहे हैं।
बेखौफ जुआरियों का अड्डा, जंगलों में 'रंग-रंगीला' इंतज़ाम
जंगलों की सुरक्षा और शांति को दरकिनार कर जुए के इन फड़ों पर जुआरियों को आकर्षित करने के लिए तमाम तरह के अनैतिक साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो फड़ संचालकों द्वारा यहाँ 'शराब, शबाब और कबाब' का पूरा इंतज़ाम किया जा रहा है। घने जंगलों के बीच चल रहे इस अवैध कारोबार में देर रात तक महफिलें जमती हैं। कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए यह फड़ अब सिर्फ जुए का केंद्र नहीं, बल्कि गंभीर अपराधों की नर्सरी बनते जा रहे हैं।
ब्याज का जाल: गहने और वाहन हो रहे जब्त
इस अवैध धंधे में जुआरियों की हार-जीत से इतर, 'लाल' (कमीशन) वसूलने वाले और सूदखोर हर दिन मोटी कमाई कर रहे हैं। जुए की लत में डूबे लोगों को मौके पर ही भारी ब्याज पर रकम मुहैया कराई जाती है। जब कोई जुआरी हारकर पैसे लौटाने में असमर्थ होता है, तो उससे जबरन सोने-चांदी के जेवर, बाइक या अन्य कीमती सामान ऐंठ लिए जाते हैं। इस तरह कई परिवार तबाही के कगार पर पहुँच चुके हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन इस भयावह स्थिति से आँखें मूंदे बैठा है।
पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
खैरहा थाना क्षेत्र के जंगलों में जिस बड़े पैमाने पर यह अवैध कारोबार चल रहा है, उससे पुलिस की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर फड़ का संचालन बिना स्थानीय पुलिस की शह या ढिलाई के संभव ही नहीं है। पुलिस की इस रहस्यमयी खामोशी से क्षेत्र में चर्चाओं का बाज़ार गर्म है कि क्या खाकी की छत्रछाया में ही जंगलों को जुए का अड्डा बनने दिया जा रहा है?
बड़ी वारदात की आहट, फिर भी तंत्र बेखबर
जंगलों के सन्नाटे में पनप रहे इस अवैध तंत्र के कारण किसी भी दिन भारी खूनी संघर्ष या बड़ी आपराधिक घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। नशे और कर्ज़ के दलदल में फंसे लोग किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखते हैं। इसके बावजूद खैरहा थाना पुलिस केवल मूकदर्शक बनी हुई है। यदि समय रहते पुलिस ने इन फड़ों पर शिकंजा नहीं कसा और कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो सकती है।

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