शहडोल:पंडित शम्भूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय, शहडोल में हिंदी पखवाड़ा – संगोष्ठी, व्याख्यान और विविध प्रतियोगिताएँ

 पंडित शम्भूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय, शहडोल में हिंदी पखवाड़ा – संगोष्ठी, व्याख्यान और विविध प्रतियोगिताएँ

शहडोल। पंडित शम्भूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय, शहडोल (म.प्र.) में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पखवाड़ा उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। इस अवसर पर दो चरणों में विविध शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरू प्रो. रामशंकर ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि “हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता की आत्मा है। यह विश्व में भारत की पहचान को स्थापित करती है। आज आवश्यकता है कि हम हिंदी को तकनीक और शोध के क्षेत्र में भी अग्रणी बनाएं।”

विशिष्ट अतिथि प्रो. आशीष तिवारी ने कहा कि “हिंदी का अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य लगातार सशक्त हो रहा है। प्रवासी भारतीय समुदाय और डिजिटल माध्यमों ने हिंदी को विश्व पटल पर नई पहचान दी है।”

प्रो. महेंद्र किशोर भटनागर ने अपने विचार रखते हुए कहा कि “हिंदी साहित्य भारतीय ज्ञान परंपरा का संवाहक है। इसके बिना हमारी सांस्कृतिक विरासत अधूरी है।”

प्रो. विनोद शर्मा ने कहा कि “हिंदी की दशा और दिशा तभी सशक्त होगी जब हम इसे अपने दैनिक जीवन और प्रशासनिक कार्यों में सहज रूप से अपनाएँ।”

विश्वविद्यालय परिसर प्राभारी प्रो. गीता सराफ ने कहा कि “हिंदी हमारी मातृभाषा होने के साथ-साथ सामाजिक सरोकार और संवेदनशीलता की भाषा है। विद्यार्थियों को इसमें लेखन और अभिव्यक्ति की क्षमता बढ़ानी चाहिए।”

हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. गंगाधर ढोके ने बताया कि “हिंदी पखवाड़ा विद्यार्थियों में भाषा के प्रति आत्मीयता जगाने और उन्हें साहित्यिक व सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर प्रदान करता है।” आपने अपने वक्तव्य में कहा भारतीय दर्शन में समन्वय की परम्परा को भक्तिकालीन साहित्यिक धाराओं में देखा जा सकता है । विभागाध्यक्ष हिन्दी ने कहा वस्तुत: भक्ति कालीन साहित्य उपनिषदकाल में महान ऋषियों, मुनियों और नाथ सम्प्रदाय एवं सिद्धों की ध्यान और योग की पद्धतियां ही है जो सरलीकृत रूप में साधारण भारतीय जनमानस की चेतना के अनुरूप व्यक्त हुई है । जिसका असर सूफी साहित्य में ग़ालिब की रचनाओं में भी दृष्टिगत होता है ।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में “हिन्दी का अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य” विषय पर संगोष्ठी तथा “राजभाषा हिन्दी की दशा एवं दिशा” विषय पर व्याख्यान आयोजित किए गए। साथ ही “भारतीय ज्ञान परंपरा में हिन्दी साहित्य की भूमिका” विषय पर निबंध प्रतियोगिता, हिंदी के महत्व पर आधारित स्लोगन प्रतियोगिता, प्रश्नमंच प्रतियोगिता तथा प्रतिष्ठित कवियों की रचनाओं एवं स्वरचित रचनाओं पर आधारित काव्य-पाठ का कमशः आयोजन किया जाएगा।

पखवाड़े के दूसरे कार्यक्रम में हिंदी वर्तनी प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता तथा काव्य-लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर हिंदी की समृद्ध परंपरा और सृजनात्मक शक्ति को उजागर करेंगे।

इस अवसर पर विभाग से आयुष, डॉ. लोकेश, मंजुला और वीरेंद्र ने भी अपने विचार रखे और हिंदी के विकास में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत मे डॉ  संगीता धुर्वे ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

पूरे कार्यक्रम का  संचालन डॉ. दिलीप तिवारी ने किया। अंत में सभी प्रतिभागियों एवं विद्वानों के प्रेरणादायी उद्बोधनों के साथ हिंदी पखवाड़े के कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ।

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