भाजपा राजनगर मंडल अध्यक्ष के निर्णय भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए भस्मासुरी न हो साबित
जिला ब्यूरो मुनेन्द्र यादव
भाजपा राजनगर मण्डल का एक दौर था जब पूरे जिले में राजनगर मंडल संगठन के कार्यों को लेकर सबसे अव्वल रहा करता था।बूथ से लेकर संगठन स्तरीय कार्यक्रम हो या किसी कार्यक्रम की सहभागिता को लीड करना हो राजनगर मण्डल हमेशा आगे रहता था। लेकिन जैसे ही मण्डल अध्यक्ष का बदलाव हुआ वैसे ही राजनगर मण्डल पूरे जिले में फिसड्डी होता चला गया। राजनगर मंडल अध्यक्ष की एकला चलो की नीति भाजपा को गर्त में धकेलना का काम कर रही है, जिसकी वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं में फुट एवं निराशा का संचार हुआ है एवं पार्टी कार्यकर्ता धीरे-धीरे पार्टी से दूरी बनाने लगे हैं। जिसका असर आने वाले नगरीय निकाय चुनाव एवं विधानसभा चुनाव में दिखेगा सूत्रों के अनुसार अगर पार्टी हाई कमान ऐसे मंडल अध्यक्ष को तानाशाही करने की छूट देकर रखेगी तो आने वाले समय में पार्टी को कार्यकर्ताओं की कमी भी झेलनी पड़ेगी क्योंकि वर्तमान मंडल अध्यक्ष द्वारा पार्टी कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं दिया जाता है। जिससे पार्टी कार्यकर्ता पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बनाने लगे हैं।
कार्यकारिणी गठन में डेढ़ साल का लगा समय, जिले में सबसे फिसड्डी
वैसे तो पहले भाजपा मंडल में राजनगर मंडल संगठन के कार्यों में अव्वल रहा करता था लेकिन जैसे ही नए मंडल अध्यक्ष का चयन हुआ उसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं का संगठनात्मक कार्यों में दिलचस्पी न लेना मंडल अध्यक्ष की नाकामी का उदाहरण है मंडल अध्यक्ष का चयन हुए डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद पार्टी के कार्यकारिणी का गठन नहीं किया जा सका था जबकि वहीं पाषाण मंडल के अध्यक्ष चयन होते ही कार्यकारिणी का सफलतापूर्वक गठन कर लिया गया। जिससे राजनगर मंडल के भाजपा कार्यकर्ताओं में पार्टी के कार्यों के प्रति उदासीनता साफ देखी जा रही है सूत्रों के अनुसार पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष एकला चलो नीति का अनुसरण करते हैं और पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जाता है
शासकीय कर्मचारी और गैर मीडिया कर्मी को बनाया मीडिया प्रभारी
वैसे तो राजनगर मंडल नए मंडल अध्यक्ष बनने के बाद से ही निष्क्रिय से नजर आ रही थी लेकिन खबरों के लगातार प्रशासन के बाद मंडल अध्यक्ष द्वारा अपनी कार्यकारिणी का गठन तो कर लिया गया लेकिन इस पर भी भारी भी संगति देखने को मिली है जो कार्यकर्ता पार्टी के लिए तन मन धन से समर्पित रहता था ऐसे कार्यकर्ताओं को पार्टी पर उचित पद ना दिया जाना समर्पित कार्यकर्ताओं की की निष्ठा को ठेस पहुंचाने जैसा कार्य है मंडल अध्यक्ष द्वारा अपनी कार्यकारिणी में मीडिया प्रभारी के रूप में जिनका चयन किया गया है वह एक तरफ सास की कर्मचारी हैं और दूसरी तरफ शासकीय कर्मचारी होने के कारण पत्रकारिता से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है उसके बावजूद ऐसे शख्स को मीडिया प्रभारी बनाना पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों पर सवालिया निशान खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि भाजपा जिला अध्यक्ष द्वारा इस भूल को सुधार किया जाता है या फिर एकला चलो की नीति को संरक्षण दिया जाएगा
कार्यकारिणी के गठन होते ही इस्तीफो का दौर हुआ शुरू
नवीन मंडल अध्यक्ष बनते ही भाजपा की संघटनात्मक कार्य प्रणाली धीमी गति से कार्य करने लगी लगातार खबरों के प्रकाशन के बाद मंडल अध्यक्ष द्वारा डेढ़ साल बाद कार्यकारिणी का गठन तो कर लिया गया लेकिन पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ताओं को कार्यकारिणी में गठन न दिए जाने की वजह से कार्यकारिणी के गठन के बाद ही इस्तीफा का सिलसिला चल पड़ा था अगर इसी तरह से मंडल अध्यक्ष द्वारा पार्टी के कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज और पद से वंचित रखा जाएगा तो आने वाले समय में पार्टी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है

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