अनूपपुर:नगर परिषद बनगवां: स्वच्छता अभियान के नाम पर 'तेल' का खेल, दो दिन थमे रहते हैं कचरा गाड़ियों के पहिए

नगर परिषद बनगवां: स्वच्छता अभियान के नाम पर 'तेल' का खेल, दो दिन थमे रहते हैं कचरा गाड़ियों के पहिए

अनूपपुर। बनगवां (अनूपपुर): प्रधानमंत्री के 'स्वच्छ भारत अभियान' को अनूपपुर जिले की नगर परिषद बनगवां में पलीता लगाया जा रहा है। एक तरफ जहां सरकार शहरों को चकाचक करने के लिए करोड़ों का फंड जारी कर रही है, वहीं बनगवां में स्वच्छता के नाम पर पेट्रोल और डीजल का बड़ा 'बंदरबांट' होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

हफ्ते में 2 दिन थमे रहते हैं पहिए, फिर भी डीजल फूंकने में जिले में नंबर वन; क्या यह ईमानदारी है या बड़ा घोटाला?

हफ्ते में दो दिन गायब रहती है कचरा गाड़ी स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर परिषद की कचरा उठाने वाली गाड़ियां हफ्ते में दो दिन मोहल्लों में नहीं आतीं। कचरा गाड़ियों के न चलने से जगह-जगह गंदगी का अंबार लग रहा है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। जनता सवाल पूछ रही है कि जब गाड़ियां चल ही नहीं रही हैं, तो उनके नाम पर आवंटित होने वाला ईंधन कहां जा रहा है?

जिले में डीजल खपत में 'नंबर वन' बनी परिषद

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नगर परिषद बनगवां पूरे जिले में डीजल और पेट्रोल की खपत के मामले में सबसे ऊपर है। चौंकाने वाली बात यह है कि कागजों पर तो गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं और भारी-भरकम ईंधन के बिल भुगतान किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर गाड़ियां खड़ी नजर आती हैं।

बड़ा सवाल: आखिर वो कौन सा जादू है कि गाड़ियां गैरेज में खड़ी हैं और डीजल का टैंक खाली हो रहा है?

फंड का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की बू

स्वच्छता मद में आने वाले सरकारी फंड का उपयोग शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के बजाय, ईंधन के फर्जी बिलों और बंदरबांट में किया जा रहा है। अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से राजस्व को चूना लगाया जा रहा है।

मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं:

फर्जी लॉग बुक: क्या गाड़ियों की लॉग बुक में बिना चले ही किलोमीटर दर्ज किए जा रहे हैं?

ईंधन का मिलान: परिषद द्वारा खरीदे गए कुल डीजल और गाड़ियों द्वारा तय की गई वास्तविक दूरी में भारी अंतर।

जनता की अनदेखी: टैक्स भरने के बावजूद जनता को दो दिन तक कचरा सड़ने की बदबू झेलनी पड़ रही है।

प्रशासनिक मौन पर उठते सवाल

इतने बड़े स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार के बावजूद जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी संदेह पैदा करती है। क्या इस 'तेल के खेल' में ऊपर तक हिस्सेदारी है? बनगवां की जनता अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है।

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