संगठनात्मक संघर्ष और शासकीय सक्रियता की बड़ी जीत: धनपुरी की मासूम के गुनहगार को 20 साल की कैद, मेहुल श्रीवास्तव ने बताया न्याय की विजय
शहडोल/धनपुरी। धनपुरी की 9 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के मामले में आज न्याय की प्रतिस्थापना हुई है। माननीय न्यायालय ने मानवता को शर्मसार करने वाले आरोपी दुकानदार को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 1 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह ऐतिहासिक निर्णय राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रांत मंत्री श्री मेहुल श्रीवास्तव के नेतृत्व में किए गए प्रखर संघर्ष और पुलिस-प्रशासन के बीच सटीक समन्वय का प्रतिफल है।
न्याय की हुंकार: सड़क से न्यायालय तक संघर्ष
घटना के सामने आते ही राष्ट्रीय बजरंग दल ने इस अन्याय के विरुद्ध बिगुल फूँक दिया था। प्रांत मंत्री मेहुल श्रीवास्तव ने स्वयं मोर्चे की कमान संभालते हुए न केवल पीड़ित परिवार को सुरक्षा का भरोसा दिलाया, बल्कि प्रशासन पर त्वरित और निष्पक्ष जांच के लिए लोकतांत्रिक दबाव बनाया। उनके नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों ने यह सुनिश्चित किया कि धनपुरी की बेटी को न्याय दिलाने की आवाज कभी धीमी न पड़े।
शासकीय एवं प्रशासनिक योद्धाओं का अविस्मरणीय सहयोग
इस कानूनी लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाने में प्रशासन के दो कर्मठ अधिकारियों का योगदान अत्यंत स्मरणीय और गौरवशाली रहा:
थाना प्रभारी खेमसिंह पेंदरों: विवेचना के दौरान थाना प्रभारी पेंदरों ने जिस संवेदनशीलता और व्यावसायिक कुशलता का परिचय दिया, वह काबिले तारीफ है। उनके द्वारा जुटाए गए अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्यों और समयबद्ध चार्जशीट ने अपराधी के बचने के सभी रास्ते बंद कर दिए।
शासकीय अधिवक्ता (सरकारी वकील) आलोक राय: न्यायालय के पटल पर सरकार का पक्ष रखते हुए श्री आलोक राय ने अत्यंत प्रभावशाली और तार्किक पैरवी की। उनकी कानूनी सूझबूझ और तथ्यों की सही प्रस्तुति ने ही दरिंदे को कठोरतम सजा दिलाने में सफलता प्राप्त की।
मेहुल श्रीवास्तव का वक्तव्य: "न्याय की मशाल बुझने नहीं देंगे"
न्यायालय के इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मेहुल श्रीवास्तव ने कहा—
"यह सजा उन सभी नरपिशाचों के लिए एक चेतावनी है जो हमारी मासूम बेटियों की मर्यादा को ठेस पहुँचाने का विचार भी रखते हैं। धनपुरी की उस बेटी का साहस, जिसने दांतों से काटकर खुद की जान बचाई, आज इस फैसले के साथ सार्थक हुआ है। मैं थाना प्रभारी खेमसिंह पेंदरों जी और शासकीय अधिवक्ता आलोक राय जी के स्मरणीय सहयोग के लिए उनका हृदय से अभिनंदन करता हूँ। जब संगठन की शक्ति और शासन की ईमानदारी एक साथ मिलती है, तो न्याय को कोई नहीं रोक सकता।"
सामाजिक विश्वास की पुनर्स्थापना
इस फैसले से न केवल धनपुरी बल्कि पूरे प्रदेश में यह संदेश गया है कि यदि समाज और संगठन जागरूक हो, तो कानून का शासन अडिग रहता है। राष्ट्रीय बजरंग दल ने स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में भी मातृशक्ति के सम्मान की रक्षा हेतु शासन-प्रशासन के साथ मिलकर इसी प्रकार तत्परता से खड़ा रहेगा।

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