भाजपा की साख पर सवाल? नगर परिषद अध्यक्ष यशवंत सिंह की भूमिका पर उठे गंभीर आरोप
सलाहकार,ठेकेदार, सप्लायर कांग्रेसी, भाजपाइयों के हिस्से केवल बदनामी
जिला ब्यूरो मुनेन्द्र यादव
अनूपपुर। नगर परिषद अध्यक्ष यशवंत सिंह इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। एक ओर वे खुद को भारतीय जनता पार्टी का समर्थक बताते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके कार्यों और निर्णयों को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह सवाल खड़े हो रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष की कार्यशैली को लेकर कई भाजपाइयों में नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि प्रशासनिक और विकास कार्यों में वे कथित रूप से कांग्रेस से जुड़े सलाहकारों, ठेकेदारों और सप्लायर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष गहराता जा रहा है।इतना ही नहीं, यह भी कहा जा रहा है कि अध्यक्ष द्वारा कांग्रेस के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शन महज एक “कूटनीतिक चाल” हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की रणनीति के जरिए वे दोनों पक्षों के साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक स्थिति मजबूत बनी रहे।
सलाहकार,ठेकेदार,सप्लाई कर कांग्रेसी मलाई छान रहे, भाजपाई बिछा रहे दरी
वैसे तो नगर परिषद बनगवां के अध्यक्ष खुद को भाजपाई दिखा रहे हैं। लेकिन अगर अंदरूनी स्थिति का जायजा लिया जाए तो पूरी परिषद कांग्रेसी ठेकेदार सप्लायर की ऐशगाह बनी हुई है। नगर परिषद के अंतर्गत निकलने वाले करीब 90% निर्माण कार्यों की ठेकेदारी कांग्रेस समर्थित ठेकेदारों को मिल रहा है। जिसकी वजह से निर्माण कार्यों में जमकर धांधली और भ्रष्टाचार हो रहा है क्योंकि अगर निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार होगा तभी सत्ताधारी दल का नाम खराब होगा। नगर परिषद में बैठे अध्यक्ष को केवल अपने कमिशन से ही सरोकार है। अगर इस बारे में किसी आमजन या भाजपाई द्वारा पूछा जाता है कि आखिर सभी निर्माण कार्यों का ठेका कांग्रेस के नेताओं को क्यों मिल रहा है, तो एक घिसा पिटा सवाल होता है की ऑनलाइन टेंडर निकलते हैं और उनको मिल जाता है। आखिर भाजपा समर्थित नगर परिषद होने के बावजूद भाजपाइयों को कांग्रेसी ठेकेदारों की जी हुजूरी कब तक करना पड़ेगा।
सरकार की योजनाओं का सार्वजनिक मंचों से करते हैं विरोध
सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब अध्यक्ष ने सार्वजनिक मंचों पर सरकार की योजनाओं का खुलकर विरोध किया। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या वे वास्तव में पार्टी की विचारधारा के साथ खड़े हैं या फिर यह सब एक दिखावा है।भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि पार्टी का कोई पदाधिकारी ही सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाएगा, तो इसका सीधा असर पार्टी की साख पर पड़ेगा। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर भाजपा की अंदरूनी स्थिति पर तंज कस रहा है।
यशवंत सिंह की खामोशी उसके कांग्रेसी सांठगांठ की खोल रहा कलई
फिलहाल, इस पूरे मामले पर अध्यक्ष यशवंत सिंह खामोश है क्योंकि तगड़े कमीशन ने उसकी जुबान पर खामोशी का ताला जड़ दिया है। लेकिन जिस तरह से आरोप और चर्चाएं तेज हो रही हैं, उससे साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमा सकता है।
अब देखना यह होगा कि संगठन कब तक भाजपाई की आड़ में हाथ का साथ दे रहे अध्यक्ष पर लगाम लगाती है
नगर परिषद की राजनीति में उठे इस विवाद ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पार्टी की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि भाजपा नेतृत्व इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या अध्यक्ष इन आरोपों का जवाब देते हैं या नहीं।

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