प्रदूषण की मार, जिम्मेदारों को नहीं सरोकार
जीवनरेखा बनी खतरा, सोन नदी में बढ़ता प्रदूषण, जिम्मेदार मौन
Ajay kewat शहडोल। जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली सोन नदी में प्रदूषण का संकट लगातार गहराता जा रहा है। बार-बार शिकायतों और सबूतों के सामने आने के बावजूद भी दूषित पानी छोड़े जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। स्थानीय लोगों ने ओरिएंट पेपर मिल पर आरोप लगाया है कि, फैक्ट्री से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी, बिना पर्याप्त शोधन के सीधे तौर नदी में प्रवाहित किया जा रहा है।
कार्यशैली में नहीं हो रहा बदलाव
स्थानीय निवासियों का कहना है कि, यह कोई नया मामला नहीं है। बल्कि, एक लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों को अवगत कराया जा रहा है। लेकिन, जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि, मानो जिम्मेदार अधिकारियों को इस गंभीर विषय से कोई सरोकार नहीं। उल्टा यह आरोप भी है कि, शिकायतों के बाद भी फैक्ट्री प्रबंधन अपनी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं कर रहा।
कैमरे में कैद हो रहा प्रदूषण
हाल के दिनों में सामने आई फोटोग्राफ्स और वीडियोग्राफी ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। जिसमें साफ तौर में यह दिख रहा है कि, किस तरह से दूषित पानी को नालों के जरिए नदी की ओर बहाया जा रहा है। इन्हीं साक्ष्यों को जुटाने में सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश पाण्डेय की भूमिका भी सामने आई है, जिन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका संदिग्ध
मामले में सबसे ज्यादा सवाल क्षेत्रीय कार्यालय मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शहडोल की कार्यप्रणाली को लेकर खड़े हो रहे हैं। जब लगातार शिकायतें मिल रही हैं और सबूत भी सामने हैं, तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? यह सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि, यदि समय रहते सख्त कदम उठाए जाते, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
निष्पक्ष जांच की मांग, सभी की मौजूदगी में
सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश पाण्डेय की मांग है कि, इस पूरे मामले की जांच पारदर्शी तरीके से कराई जाए। जांच के दौरान वीडियोग्राफी अनिवार्य की जाए और इसमें स्थानीय निवासी, जनप्रतिनिधि, पत्रकार और मिल प्रबंधन के प्रतिनिधि मौजूद रहें। ताकि, किसी भी तरह की अनदेखी या पक्षपात की गुंजाइश न रहे।
स्वास्थ्य और खेती पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
सोन नदी का पानी आसपास के गांवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पीने के पानी से लेकर खेती-किसानी और पशुपालन तक, बड़ी आबादी इसी पर निर्भर है। ऐसे में यदि इसमें केमिकल युक्त पानी मिल रहा है, तो यह सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
प्रशासनिक कारवाही पर टिकी, आम लोगों की निगाहें
सोन नदी में बढ़ता प्रदूषण अब एक गंभीर चेतावनी बन चुका है। शिकायतों, सबूतों और जनदबाव के बावजूद यदि जिम्मेदार विभाग सक्रिय नहीं होते, तो यह न सिर्फ पर्यावरण बल्कि, शासन व्यवस्था की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर कितना गंभीर कदम उठाता है।

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