अनूपपुर:नगर परिषद बनगवां: भ्रष्टाचार के दलदल में 'अध्यक्ष' की छटपटाहट, अनशन के नाम पर 'गीदड़ भभकी' का खेल!

नगर परिषद बनगवां: भ्रष्टाचार के दलदल में 'अध्यक्ष' की छटपटाहट, अनशन के नाम पर 'गीदड़ भभकी' का खेल!



जिला ब्यूरो मुनेन्द्र यादव

बनगवां। नगर परिषद बनगवां इन दिनों विकास कार्यों के लिए नहीं, बल्कि अध्यक्ष यशवंत सिंह के कारनामों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। सत्ता की हनक और कमीशनखोरी की भूख ने परिषद को भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया है। ताज्जुब की बात यह है कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अध्यक्ष अब खुद को 'दूध का धुला' बताने के लिए आमरण अनशन जैसी 'गीदड़ भभकी' का सहारा ले रहे हैं।

4 साल का हिसाब: भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा विकास?

पिछले 4 सालों में नगर परिषद क्षेत्र में जितने भी निर्माण कार्य हुए हैं, उन पर भ्रष्टाचार की गहरी कालिख पुती है। स्थानीय लोगों और जानकारों का आरोप है कि अध्यक्ष ने न केवल गुणवत्ता से समझौता किया, बल्कि हर फाइल को आगे बढ़ाने के लिए कमीशन का एक 'फिक्स्ड रेट' तय कर रखा है।

अधिकारियों पर दबाव बनाता है नगर परिषद बनगवां अध्यक्ष यशवंत सिंह

सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष यशवंत सिंह ईमानदार अधिकारियों पर अनैतिक दबाव बनाने के लिए कुख्यात हैं। जो अधिकारी उनकी 'कमीशन वाली लाइन' पर नहीं चलता, उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और ऊपर तक शिकायत की धमकी देना इनका पुराना पैंतरा है।

भ्रष्टाचार की 'गारंटी': 13 लाख का शौचालय, 13 महीने भी नहीं!

नगर परिषद की कार्यप्रणाली का सबसे भद्दा उदाहरण वह शौचालय है, जिसे 13 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि से बनाया गया। ताज्जुब देखिए कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा यह शौचालय 13 महीने भी सही सलामत नहीं रह सका। आज इसकी जर्जर हालत अध्यक्ष के 'ईमानदार' विकास दावों की पोल खोल रही है।


अधूरी सड़कें, पूरा कमीशन सड़क ऊपर बना डाली सड़क


गजब का फर्जीवाड़ा!

भ्रष्टाचार का सबसे शातिर खेल कॉलरी क्षेत्र में देखने को मिला। कॉलरी द्वारा बनाई गई मजबूत सड़क को अभी 6 महीने भी नहीं हुए थे, कि अध्यक्ष ने कमीशन की भूख मिटाने के लिए उसी के ऊपर परिषद की सड़क बनवा दी।80 लाख रुपये की लागत वाली सड़क आज भी अधूरी पड़ी है। ठेकेदार और अध्यक्ष की जुगलबंदी ने जनता के पैसे को मिट्टी में मिला दिया, लेकिन भुगतान और कमीशन का खेल पर्दे के पीछे बखूबी अंजाम दिया गया।

आपदा में अवसर: जनता प्यासी, अध्यक्ष बेच रहे टैंकर!

बनगवां की जनता पानी की एक-एक बूंद के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है। भीषण जल संकट के समय जहां एक जनप्रतिनिधि को राहत पहुंचानी चाहिए, वहां अध्यक्ष यशवंत सिंह 'आपदा में अवसर' तलाश रहे हैं। आरोप है कि परिषद के संसाधनों का उपयोग कर जनता को मुफ्त पानी देने के बजाय पानी के टैंकर बेचे जा रहे हैं। प्यासी जनता की हाय, अध्यक्ष के लिए कमाई का जरिया बन चुकी है।

विवाद की रणनीति, कॉलरी पर झूठा आरोप लगाकर छुपा रहा खुद का भ्रष्टाचार

जब मामला फंसा, तो अब अधिकारियों और कॉलरी प्रबंधन पर झूठा दोषारोपण किया जा रहा है कि वे विकास में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। हकीकत यह है कि यह दोहरी फाइल बनाकर सरकारी पैसे को ठिकाने लगाने की साजिश थी।

डीजल-पेट्रोल का 'महिमामंडन' और अवैध कारोबार को संरक्षण

अध्यक्ष ने अपनी झूठी शान और महिमामंडन के लिए पिछले 4 सालों में कई करोड़ रुपये का डीजल और पेट्रोल फूंक दिया। सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल जनसेवा के बजाय अध्यक्ष की निजी ब्रांडिंग और रसूख दिखाने में किया जा रहा है।

नैतिकता का दोहरा मापदंड जब कमीशन न मिले तो देता है ज्ञापन

 दिखावे के लिए दारू, सट्टा और जुआ के खिलाफ ज्ञापन सौंपे जाते हैं।चर्चा है कि जैसे ही 'कमीशन' की सेटिंग हो जाती है, सारे अवैध कारोबार को अभयदान मिल जाता है। सटोरियों और शराब माफियाओं के साथ अध्यक्ष की 'जुगलबंदी' अब किसी से छिपी नहीं है।


बड़ा सवाल: बिना टेंडर कैसे चमक रहे हैं अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के कक्ष?

अध्यक्ष का दावा है कि पिछले डेढ़ साल में परिषद में कोई नया टेंडर नहीं हुआ है। अगर यह सच है, तो जनता यह पूछ रही है कि:

"नगर परिषद कार्यालय में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के कक्षों का जो आलीशान रेनोवेशन (नवीनीकरण) हो रहा है, उसके लिए पैसा कहाँ से आ रहा है? किस फंड और किस योजना के तहत ये काम कराया जा रहा है?"बिना टेंडर के लाखों के रेनोवेशन कार्य सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करते हैं। क्या यह काम भी किसी 'पसंदीदा' ठेकेदार को उपकृत करने के लिए बैक-डेट में या बंदरबाँट के जरिए किया जा रहा है?

भाजपा का लेटर पैड, कांग्रेसियों का 'कब्जा'

बनगवां परिषद में विचारधारा का अनोखा 'कॉकटेल' देखने को मिल रहा है। एक तरफ अध्यक्ष भाजपा के लेटर पैड का इस्तेमाल कर शिकायतें और राजनीति करते हैं, वहीं दूसरी ओर परिषद में ठेकेदारी और सप्लाई की पूरी कमान कांग्रेसियों के हाथों में है।

अध्यक्ष के कार्यकाल में जितने भी निर्माण कार्य, सप्लाई सब की हो उच्च स्तरीय जांच, जनता की मांग

अध्यक्ष की यह 'छटपटाहट' बता रही है कि कहीं न कहीं उनकी जड़ें हिल रही हैं। आमरण अनशन की धमकी देकर वे शायद प्रशासन को डराने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उनके पिछले 4 साल के काले कारनामों की फाइलें न खुलें।

नगर की जनता अब शासन और प्रशासन से मांग कर रही है कि पिछले 4 साल के निर्माण कार्यों, बिना टेंडर हो रहे रेनोवेशन और सामग्री सप्लाई की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

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