शर्मनाक: प्यासी जनता की 'हाय' और अध्यक्ष की 'कमाई', आपदा में अवसर तलाश रहा नगर परिषद का मुखिया!
जिला ब्यूरो मुनेन्द्र यादव
अनूपपुर। नगर में त्राहि-त्राहि: 10 दिनों तक बूंद-बूंद को तरसे लोग, अध्यक्ष ने वार्डों में जाने के बजाय पानी बेचने को बनाया व्यापार
राजनीति जब संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर जाए, तो वह 'जनसेवा' नहीं बल्कि 'जन-शोषण' बन जाती है। पिछले 10 दिनों से शहर की जनता पानी की एक-एक बूंद के लिए तड़प रही थी, लेकिन नगर परिषद अध्यक्ष की बेशर्मी का आलम यह रहा कि उन्होंने जनता का हाल जानना तो दूर, संकट की इस घड़ी को कमाई का जरिया बना लिया।
कॉलरी की पाइपलाइन सुधरी, पर अध्यक्ष की नीयत नहीं
कॉलरी की मुख्य पाइपलाइन फटने से पिछले 10 दिनों से शहर की जल आपूर्ति ठप थी। लोग प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटक रहे थे। 10 दिन बाद जब पाइपलाइन सुधरी, तब जाकर जनता की जान में जान आई। लेकिन इन 10 दिनों के 'वनवास' ने अध्यक्ष के असली चेहरे को बेनकाब कर दिया है।
आपदा में अवसर: टैंकर का पानी बांटने के बजाय बेचा गया!
नगर की जनता का आरोप है कि जिन वार्डों में पानी की सप्लाई बंद थी, वहां नगर परिषद के टैंकरों को मुफ्त भेजने के बजाय अध्यक्ष के इशारे पर पानी बेचा गया। सरकारी संसाधनों पर पहला हक जनता का होता है, लेकिन यहां 'अध्यक्ष राज' में पानी की बोली लगाई गई।
"जब हमें जरूरत थी, तब अध्यक्ष साहब गायब थे। अब अपनी नाकामी छुपाने के लिए पैसे देकर झूठी वाहवाही वाली खबरें छपवा रहे हैं।" आक्रोशित वार्डवासी
आंकड़ों में भेदभाव: 60% आबादी को मिले महज 4 टैंकर
वार्ड नंबर 1, 2, 3, 4 और 5, जहां शहर की कुल जनसंख्या का लगभग 60% हिस्सा निवास करता है, वहां प्रशासन का सौतेला व्यवहार देखने को मिला। इन पांचों वार्डों में 2 दिनों के भीतर मात्र 4 टैंकर पानी भेजा गया। यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान था, जबकि रसूखदारों के यहां टैंकरों की लाइन लगी रही।
बेशर्मी छुपाने के लिए 'पेड न्यूज' का सहारा
अपनी किरकिरी होते देख और जनता के आक्रोश से बचने के लिए अब अध्यक्ष महोदय 'मैनेजमेंट' में जुट गए हैं। सूत्रों की मानें तो अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए पैसे देकर खबरें छपवाई जा रही हैं। लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है—जनता अब इस बेशर्मी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और सरेआम इस कार्यप्रणाली को धिक्कार रही है।
मुख्य बिंदु जिसने जनता को किया आक्रोशित:
1.नदारद अध्यक्ष: संकट के समय एक बार भी वार्डों का दौरा नहीं किया।
2.पानी का व्यापार: सरकारी टैंकरों से अवैध वसूली और पानी बेचने के आरोप।
3.विपक्ष और जनता का सवाल: क्या जनता ने इसी दिन के लिए आपको चुना था?

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