बिना स्पष्ट नवीनीकरण के बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन! शहडोल में प्रशासनिक प्रक्रिया पर प्रश्न
शहडोल। जिले में बायो मेडिकल वेस्ट के संग्रहण एवं निस्तारण की व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, जिले में यह कार्य कर रही एम.पी. बायो मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल सिस्टम का मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय शहडोल के साथ हुआ अनुबंध 31 मार्च 2025 को समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद संस्था द्वारा जिले के शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों से बायो मेडिकल वेस्ट का संग्रहण और परिवहन लगातार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, संस्था द्वारा अनुबंध समाप्त होने के बाद 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2025 तथा 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि के लिए ₹500 के स्टाम्प पर नए अनुबंध तैयार किए गए थे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार खबर लिखे जाने तक इन अनुबंधों के कार्यालय में विधिवत जमा होने अथवा उनके अनुमोदन का स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।
जिले में संस्था के माध्यम से ब्यौहारी सिविल अस्पताल (100 बिस्तर), गोहपारू, जयसिंहनगर, बनसूकली, सिंहपुर, बुढ़ार एवं झिकबिजुरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 100 से अधिक निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी लैब से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट का संग्रहण किया जा रहा है। इस अपशिष्ट का अंतिम निस्तारण ग्राम इटोरे, तहसील पाली, जिला उमरिया स्थित प्लांट में किया जाता है।
बायो मेडिकल वेस्ट का प्रबंधन बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के तहत किया जाता है। इन नियमों के अनुसार अधिकृत एजेंसी के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया एवं वैध अनुबंध के अनुरूप ही कार्य कराया जाना चाहिए। ऐसे में अनुबंध की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी चर्चा शुरू कर दी है।
इस संबंध में संस्था के प्रोपराइटर पलाश जैन ने कहा कि संस्था के सभी दस्तावेज नियमानुसार पूर्ण हैं और आवश्यक औपचारिकताओं का पालन किया गया है।
वहीं, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजेश मिश्रा ने कहा कि संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद ही इस मामले में अधिकृत जानकारी दी जा सकेगी।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अनुबंध के नवीनीकरण से संबंधित प्रक्रिया कब और किस स्तर पर पूरी हुई तथा यदि नहीं हुई तो इतने लंबे समय तक संस्था किस प्रशासनिक आधार पर सेवाएं देती रही। मामले में दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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