शहडोल:नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर प्रेरक व्याख्यान आयोजित

 "चिंता का रहस्य: मस्तिष्क का दोषपूर्ण चेतावनी तंत्र" विषय पर प्रणव दुबे ने किया संबोधित 

शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय, शहडोल में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से कुलपति सभागार में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान का विषय "चिंता का रहस्य: मस्तिष्क का दोषपूर्ण चेतावनी तंत्र" था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद एवं उद्यमी प्रणव दुबे उपस्थित रहे।

प्रणव दुबे ने बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग में स्नातक तथा वित्त (फाइनेंस) में माइनर डिग्री प्राप्त की है। इसके पश्चात उन्होंने क्वीन्स यूनिवर्सिटी, किंग्स्टन (कनाडा) से मास्टर ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस की उपाधि प्राप्त की तथा स्टॉकहोम स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, स्वीडन में इंटरनेशनल एक्सचेंज स्कॉलर रहे। वे कनाडा एवं स्वीडन के अंतरराष्ट्रीय स्टार्टअप्स में स्ट्रेटेजी कंसल्टेंट के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त भारत की प्रमुख कंपनियों स्विगी में भी रणनीति सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वे स्वतंत्र परियोजनाओं पर कार्यरत हैं, जिनमें मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रकल्प उनके लिए विशेष महत्व रखते हैं।

अपने व्याख्यान में प्रणव दुबे ने कहा कि चिंता स्वयं में कोई बीमारी नहीं, बल्कि मस्तिष्क का एक चेतावनी तंत्र है, जो कई बार वास्तविक खतरे से अधिक प्रतिक्रिया देने लगता है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि यदि समय रहते चिंता को समझ लिया जाए और सकारात्मक सोच, आत्म-जागरूकता, नियमित दिनचर्या तथा संवाद को अपनाया जाए, तो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से सफलता की दौड़ में मानसिक संतुलन बनाए रखने और आवश्यकता पड़ने पर सहायता लेने में संकोच न करने का आग्रह किया। और प्रभावी स्लाइड प्रेजेंशन से सभी को आत्म मुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. राम शंकर ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम, संवेदनशील और आत्मविश्वासी नागरिक तैयार करना है जो जीवन की चुनौतियों का धैर्य और विवेक के साथ सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनके मानसिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने मुख्य वक्ता प्रणव दुबे का स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया तथा विद्यार्थियों से मानसिक स्वास्थ्य को अपनी जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद पाण्डेय ने कहा कि विद्यार्थी जीवन नई संभावनाओं के साथ नई चुनौतियाँ भी लेकर आता है। ऐसे समय में सकारात्मक सोच, अनुशासन और आत्मविश्वास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं।

प्रो. प्रवीण शर्मा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा होना आज की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद बनाए रखने और किसी भी मानसिक समस्या को छिपाने के बजाय उसका समाधान खोजने का आग्रह किया।

प्रो. महेंद्र भटनागर ने कहा कि स्वस्थ मन ही रचनात्मकता और उत्कृष्ट प्रदर्शन का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ योग, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी करने की अपील की।

कुलसचिव प्रो. आशीष तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ ऐसा वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ वे मानसिक रूप से स्वस्थ, आत्मनिर्भर और नवाचार के लिए प्रेरित बन सकें।

कार्यक्रम का सफल संचालन कार्यक्रम संयोजक डॉ. मनीषा शुक्ला ने किया। उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ शरद बर्वे ,डॉ मनीष ताराम ,  विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

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