पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय में माय भारत के "नशामुक्त युवा" कार्यक्रम का आयोजन
शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय, शहडोल में माय भारत, शहडोल के तत्वावधान में "नशामुक्त युवा" विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम "नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत" रही। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए स्वस्थ, अनुशासित एवं राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राम शंकर रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. आर. आर. सिंह, पूर्व डिप्टी डायरेक्टर, माय भारत ने की। सारस्वत अतिथि के रूप में कुलसचिव डॉ. आशीष तिवारी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. गीता सराफ, परिसर प्रभारी तथा डॉ. आदर्श तिवारी, विभागाध्यक्ष, शारीरिक शिक्षा विभाग ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के संयोजक एवं युवा समन्वयक शहडोल समर्थ सोहल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। संयोजक समर्थ सोहल ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब युवा स्वयं जागरूक होकर दूसरों को भी इसके प्रति प्रेरित करें। उन्होंने माय भारत द्वारा चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियानों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों से नशे के विरुद्ध जनआंदोलन का हिस्सा बनने का आह्वान किया।
अपने मुख्य उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. राम शंकर ने कहा कि युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि युवा नशे से दूर रहकर शिक्षा, शोध, खेल और नैतिक मूल्यों को अपनाते हैं, तो देश का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मानुशासन, सकारात्मक सोच एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि अपने विराट व्यकित्व को युवा समझे मस्तिष्क में अनायास अवकाश की वजह से नशा की तरफ युवा बढ़ रहा है ।उसे अपने जीवन को रचनात्मक प्रवृत्तियों को पहचाने और विकसित भारत के लिए अपना योगदान तय करे । उन्होंने यह भी कहा कि आयोजक माय भारत के छात्रों से संवाद करते हुए उन्हें नशामुक्त जीवन अपनाने की प्रेरणा दी और कहा यहां उपस्थित सभी संकल्प ले कि न नशा करेंगे और अपने लोगों को इस दलदल से निकाल कर नव भारत विकसित भारत बनाएगे ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. आर. आर. सिंह ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं से किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशामुक्त भारत का सपना युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही साकार होगा।
कुलसचिव डॉ. आशीष तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास है। विद्यार्थियों को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर ज्ञान, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए।
डॉ. गीता सराफ ने कहा कि युवाओं को मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए सकारात्मक वातावरण, परिवार का सहयोग तथा नियमित खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज के लिए प्रेरणा बनने का संदेश दिया।
डॉ. आदर्श तिवारी ने कहा कि खेल, योग एवं नियमित व्यायाम नशे से दूर रखने के प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को खेलों में सक्रिय भागीदारी, अनुशासन तथा फिटनेस को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संगीत, नृत्य, नाटक, चित्रकला, वाद-विवाद, लघु फिल्म निर्माण, स्लोगन लेखन, रचनात्मक लेखन तथा स्लैम पोएट्री सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी रचनात्मकता, कलात्मक अभिव्यक्ति एवं बौद्धिक क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिलीप कुमार तिवारी, हिंदी विभाग द्वारा किया गया। अंत में मनीष चौहान ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा सभी ने नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु संकल्प लिया।

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