अनूपपुर:13 लाख के शौचालय का भ्रष्टाचार,130 दिन भी नहीं टिक पाया, साहब ने लोगों का टॉयलेट तक न छोड़ा

13 लाख के शौचालय का भ्रष्टाचार,130 दिन भी नहीं टिक पाया, साहब ने लोगों का टॉयलेट तक न छोड़ा

जिला ब्यूरो मुनेन्द्र यादव

अनूपपुर। नगर परिषद बनगवां शायद किसी पहचान का मोहताज नहीं है ।जब यह ग्राम पंचायत था उस समय से लेकर अब तक इसके भ्रष्टाचार की गाथा जिला ही नहीं संपूर्ण मध्य प्रदेश में गाने लायक है ।इस नगर परिषद की घोषणा पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने टूटते राजनगर को बचाने के लिए किया था। कि इसके बाद नगर परिषद बनगवां का पर्याप्त विकास होगा एवं यहां के लोगों का जीवन स्तर में सुधार आएगा ,यही सब सपनों को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्राम पंचायत से उन्नयन करके इसका गठन नगर परिषद के रूप में किया ।लेकिन शायद इस बात का अंदाजा भी पूर्व मुख्यमंत्री जी को नहीं रहा होगा कि वह यहां के लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए नहीं बल्कि यहां के भ्रष्टाचारियों के लिए खजाना खोल कर जा रहे हैं। हुआ भी वही नगर परिषद की गठन के बाद यहां भ्रष्टाचार का ऐसा खेल खेला गया कि नगर परिषद बनगवां को जिले नहीं संभाग नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में पहचाना जाने लगा ।गठन से पहले ही यहां संविलियन घोटाले की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी थी और मध्य प्रदेश में व्यापम जैसे घोटाले की पुनरावृत्ति तीनों नगर परिषद में हो गई ।उसके बाद यहां नवीन परिषद में खरीदी और निर्माण कार्यों में भी जमकर भ्रष्टाचार हुआ। लेकिन यह भ्रष्टाचार यही खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था नगर परिषद का चुनाव हुआ और फिर शुरू हुआ भ्रष्टाचार का पार्ट-2 

सखी सैया तो खुबाय कमात है, ठेकेदार डायन खाए जात है

नगर परिषद  बनगवां द्वारा बनवाए गए काली मंदिर के पास सामुदायिक शौचालय जो कि लगभग 13 लाख की लागत से बनवाया गया था ।जो निर्माण कार्य के पश्चात 13 महीने भी नहीं चल पाया । यह सामुदायिक शौचालय महज दो महीने में ही इसकी टाइल्स उखड़ने लगी तथा जमीन और दीवाल में दरारें आना शुरू हो गई। इसकी शिकायत और इसकी सच्चाई जब वार्ड पार्षदों द्वारा जनता के सामने दिखाया गया तो आनन फानन में उसको पुनः सुधारने का कार्य किया गया। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि तेरह लाख का सामुदायिक शौचालय महज दो महीने में ही क्यों टूटने की कगार पर आ गया। नगर परिषद बनगवां द्वारा अपने चहेते ठेकेदारों को निर्माण कार्य का ठेका दिया जाता है। जिसकी वजह से उनके द्वारा इन निर्माण कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार किया जाता है।

अपने विकास कार्यों में प्रमुखता से दिखाया था, पर भ्रष्टाचार ने मुंह दिखाने लायक न छोड़ा

नगर में हो रहे भ्रष्टाचारों पर जब लोगों ने उंगली उठाने शुरू कर दिए। तो नगर परिषद अध्यक्ष यशवंत सिंह द्वारा बड़ी ही चालाकी से एक ऐआई जेनरेटेड वीडियो बनवाया गया। ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके इस वीडियो में खान प्रबंधन द्वारा बनवाए गए निर्माण कार्यों को भी दिखाया गया साथ ही मध्य प्रदेश शासन द्वारा पहले से निर्मित भवनों को भी प्रदर्शित किया गया ।लेकिन कहते हैं ना की 

"सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के वसूलों से और खुशबू आ नहीं सकती कागज के फूलों से"

हुआ भी वही नगर परिषद द्वारा 13 लाख के करीब की राशि से बनवाए गए सामुदायिक शौचालय में बनवाई गई दीवाल में दरार तथा वहां की टाइल्स उखड़ कर टूटने लगी जिससे इनका भ्रष्टाचार जग जाहिर हो गया।

ब्रांडेड ठेकेदारों का ब्रांडेड काम, जब सैया है कोतवाल तो डर कहे का

नगर परिषद बनगवां में सभी कार्य कुछ गिने चुने ठेके द्वारा द्वारा ही कराए जाते हैं। जिससे सभी निर्माण कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार होता है ।क्योंकि ठेकेदारों को भी पता है कि जब अध्यक्ष ही अपने बीच का है तो हम पर क्या कार्यवाही होगी इस वजह से नगर परिषद द्वारा बनवाए गए सामुदायिक शौचालय का ठेका भी उनके एक चाहेते ठेकेदार को सौंपा गया। जिस पर उन्होंने जमकर भ्रष्टाचार किया और वह शौचालय महज दो महीने के अंदर ही क्षतिग्रस्त होने लगा। कमीशन खोरी की ऐसी लत लगी है। कि किसी भी कार्य को गुणवत्तापूर्ण बना पाना संभव ही नहीं है । जिसकी वजह से सभी निर्माण कार्य में जमकर भ्रष्टाचार किया जाता है और दोयम दर्जे की निर्माण सामग्री का प्रयोग करते हुए कार्य पूर्ण कर दिया जाता है ।अगर ठेका देते समय पारदर्शिता बरती जाती तो यह काम शायद गुणवत्तापूर्ण होता।

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