बनगवां में भ्रष्टाचार की चल रही सरकार, बिना टेंडर, वर्क ऑर्डर हो रहे काम, ईमानदार अध्यक्ष की दिख रही ईमानदारी
जिला ब्यूरो मुनेन्द्र यादव
अनूपपुर। बनगवां क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि यहां कार्य पारदर्शिता से नहीं, बल्कि “जुगाड़ नीति” के सहारे संचालित किए जा रहे हैं। आरोप है कि अध्यक्ष और संबंधित इंजीनियर की मिलीभगत से सुनियोजित तरीके से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है।सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि कई निर्माण और रेनोवेशन कार्य बिना किसी टेंडर प्रक्रिया और आधिकारिक वर्क ऑर्डर के ही शुरू कर दिए गए। नियमों को दरकिनार कर किए जा रहे इन कामों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भ्रष्टाचार की होते ही जनचर्चा,चुपके से जारी हुआ वर्क ऑर्डर, भ्रष्टाचार पर लगी मुहर
नगर परिषद बनगवां अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के कक्ष में रिनोवेशन का कार्य बिना टेंडर एवं वर्क आर्डर के ही किया जा रहा है।
जब इन अनियमितताओं की चर्चा आम लोगों की जुबान पर आने लगी और मामला तूल पकड़ने लगा, तब आनन-फानन में वर्क ऑर्डर जारी किए गए। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि पहले से किए गए कार्यों को कागजों में वैध दिखाने की कोशिश की जा रही है।
अध्यक्ष,उपाध्यक्ष कक्ष में भ्रष्टाचार का रिनोवेशन जारी है, काम जारी रखो,भ्रष्टाचारियों से अध्यक्ष की यारी है
इतना ही नहीं, सूत्रों के अनुसार पहले किए गए रेनोवेशन कार्यों का भुगतान आज तक संबंधित ठेकेदारों को नहीं मिला है, नगरीय निकाय चुनाव के बाद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था की गई जिस पर रिनोवेशन का कार्य सुनील जैन को सोपा गया। जिनके द्वारा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के कक्ष का रिनोवेशन कार्य करवाया गया लेकिन इतने साल बीत जाने के पश्चात आज तक उनके द्वारा कराए गए कार्य का भुगतान नहीं किया गया है। उसके बावजूद पुनः किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष कक्ष का रिनोवेशन का कार्य करवाया जा रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसी काम को दोबारा करवा दिया गया। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और मजबूत होती है।
नगर परिषद बनगवां के सभी निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की उठने लगी मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। लोगों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और सभी कार्यों की पारदर्शी जांच कराई जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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