अनूपपुर:भ्रष्टाचार की यशवंत सरकार': 4 साल सिर्फ 'कमीशन' का खेल, अब नियमों की सख्ती हुई तो आंदोलन का ड्रामा!

भ्रष्टाचार की यशवंत सरकार': 4 साल सिर्फ 'कमीशन' का खेल, अब नियमों की सख्ती हुई तो आंदोलन का ड्रामा!

जिला ब्यूरो मुनेन्द्र यादव

अनूपपुर/बनगवां।  नगर परिषद में पिछले चार वर्षों से जारी 'कमीशन राज' और भ्रष्टाचार के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा अब जनता के सामने आने लगा है। विकास के दावों की पोल खोलते हुए धरातल पर जो हकीकत दिख रही है, वह शर्मनाक है। सत्ता की कुर्सी पर बैठे जिम्मेदारों ने जनता के टैक्स के पैसों को अपनी 'अय्याशी' और 'महिमामंडन' की भेंट चढ़ा दिया है।

13 लाख का शौचालय, 13 महीने भी नहीं टिका!

भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखिये कि जनता की सुविधा के लिए 13 लाख की लागत से बना शौचालय 13 महीने भी अपनी मजबूती नहीं दिखा सका। भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी इमारतें धराशायी हो रही हैं। वहीं, 80 लाख रुपये की भारी-भरकम बजट वाली सड़क आज भी अधूरी पड़ी है, जिससे राहगीर और स्थानीय निवासी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

पानी को त्राहि-त्राहि करती जनता, सफाई सिर्फ कागजों पर

नगर में 'नल जल योजना' पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। भीषण गर्मी और जल संकट के बीच जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, लेकिन अध्यक्ष महोदय को इसकी परवाह नहीं। अध्यक्ष द्वारा आपदा में भी अवसर की तलाश रहती है और जब नगर की जनता पानी के लिए त्राहि त्राहि करती है उस समय नगर परिषद द्वारा टैंकरों से पानी बेचा जाता है जो कि उनकी अमानवीयता को प्रदर्शित करता है ।सफाई के नाम पर केवल मुख्य मार्गों पर झाड़ू लगवाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है, जबकि गलियां गंदगी से बजबजा रही हैं।

पुरानी उधारी बाकी, पर अपने 'महल' का रिनोवेशन जारी

नगर परिषद में पिछले भुगतानों के लिए ठेकेदार और कर्मचारी भटक रहे हैं, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने अपनी विलासिता में कोई कमी नहीं छोड़ी। पुराने बिलों को दरकिनार कर, भारी कमीशन के फेर में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष कक्ष का चमचमाता रिनोवेशन कराया गया। जनता पूछ रही है—क्या यह विकास सिर्फ कुर्सी वालों के कमरों तक सीमित है?

अपनी झूठी वाहवाही लिखवाने कई करोड़ के डीजल पेट्रोल पानी की तरह बहाया

लूट के कुछ अन्य बड़े मामले:

पेट्रोल-डीजल का खेल: पिछले 4 सालों में कई करोड़ रुपये का ईंधन परिषद की गाड़ियों के नाम पर फूंक दिया गया, जिसका बड़ा हिस्सा केवल 'महिमामंडन' और व्यक्तिगत दौरों में खर्च हुआ।

विकास करने की जगह करीब 50 हजार का बनवाया फर्जी विकास वीडियो, शासकीय भवनों को भी खुद का विकास बताया

फर्जी पीआर (PR) का सहारा: विकास के झूठे दावे करने वाले वीडियो बनवाने के लिए 50 हजार से अधिक की राशि पानी की तरह बहा दी गई।

कमीशन पर लगाम, तो धमकी का सहारा

अब जबकि जिम्मेदार अधिकारी नियमों के तहत कार्य कर रहे हैं और भ्रष्टाचार के रास्तों को बंद कर दिया गया है, तो तिलमिलाए अध्यक्ष महोदय 'आंदोलन' और 'शिकायत' की धमकियां दे रहे हैं।

"जब तक भ्रष्टाचार का हिस्सा मिल रहा था, सब ठीक था। अब जब प्रशासन ने नियमों की नकेल कसी और कमीशन खोरी बंद हुई, तो जनहित के नाम पर आंदोलन का ढोंग रचा जा रहा है।" — (एक जागरूक नागरिक)

यह स्पष्ट है कि चार साल की अध्यक्षता में केवल अपनी जेबें भरी गई हैं। अब जब हिसाब देने का वक्त आया है और भ्रष्टाचार के द्वार बंद हुए हैं, तो आंदोलन की धमकी देकर प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।



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