शहडोल:शराब माफिया के आगे नतमस्तक हुआ आबकारी विभाग बरतराई-सेमरा मार्ग बना "नशे का कॉरिडोर

शराब माफिया के आगे नतमस्तक हुआ आबकारी विभाग बरतराई-सेमरा मार्ग बना "नशे का कॉरिडोर

जिला ब्यूरो मुनेन्द्र यादव

अनूपपुर। अनूपपुर जिले में आबकारी विभाग की 'मेहरबानी' और शराब माफियाओं की 'दबंगई' का एक ऐसा कॉकटेल तैयार हुआ है, जिसने ग्रामीण जनजीवन को नर्क बना दिया है। बरतराई से लेकर सेमरा तक के पूरे इलाके में अवैध शराब की पैकारी (अवैध बिक्री) अब बेलगाम हो चुकी है। हालात ये हैं कि अधिकृत शराब दुकानें अब महज एक 'दिखावा' बनकर रह गई हैं, जबकि असली कारोबार गांवों की गलियों और मोहल्लों में फल-फूल रहा है।

कॉलरी के खंडहर और किराना दुकानें बनीं 'मधुशाला'

शराब माफियाओं ने पैकारी के लिए ऐसे सुरक्षित ठिकाने चुने हैं, जहां पुलिस की नजर कम पड़ती है। सूत्रों के अनुसार:

बंद पड़े कॉलरी क्वार्टर: कॉलरी क्षेत्र के खाली और जर्जर क्वार्टर अब अपराधियों और शराब तस्करों के सुरक्षित अड्डे बन चुके हैं।

किराना और पान ठेले: जिस दुकान पर बच्चों के लिए बिस्किट और चॉकलेट मिलनी चाहिए, वहां अब काउंटर के नीचे से अवैध शराब की बोतलें परोसी जा रही हैं।

होटल और ढाबे: क्षेत्र के लगभग हर छोटे-बड़े होटल और ढाबे अब 'अघोषित बार' में तब्दील हो चुके हैं, जहां देर रात तक जाम छलकते हैं और गाली-गलौज का दौर चलता है।

'कभी भी, कहीं भी' – पिज्जा से भी तेज शराब की होम डिलीवरी

हैरानी की बात यह है कि इस क्षेत्र में शराब की 'होम डिलीवरी' सेवा इतनी सक्रिय है कि एक फोन कॉल पर बाइक सवार पैकार घर तक शराब पहुंचा देते हैं। शराब माफिया का नेटवर्क इतना मजबूत है कि उन्होंने समय और स्थान की बंदिशें खत्म कर दी हैं। सुबह हो या आधी रात, सेमरा से बरतराई के बीच 'अवैध रस' की धारा निर्बाध बह रही है।

सनसनीखेज खुलासा: 'सादे लिबास' में विभाग का वसूली एजेंट!

सूत्रों से मिली जानकारी बेहद चौंकाने वाली है। चर्चा है कि आबकारी विभाग का ही एक कर्मचारी अक्सर सादे कपड़ों (सिविल ड्रेस) में इस रूट पर सक्रिय रहता है। आरोप है कि यह कर्मचारी कार्रवाई करने के बजाय, हर अवैध अड्डे और पैकार से 'महीने की वसूली' (प्रोटेक्शन मनी) इकट्ठा करता है। यही कारण है कि शिकायतों के अंबार के बावजूद विभाग ने अपनी आंखें मूंद रखी हैं।

बर्बाद होता भविष्य, बेबस प्रशासन

इस अवैध कारोबार का सबसे बुरा असर स्थानीय आदिवासी समाज और युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है। मजदूरों की मेहनत की कमाई शराब की भेंट चढ़ रही है। जब रक्षक ही 'वसूली भाई' की भूमिका में आ जाएं, तो जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?

प्रशासन से सीधे सवाल:

क्या आबकारी विभाग को बरतराई से सेमरा के बीच चल रहे इन अड्डों की जानकारी वाकई नहीं है?

सादे लिबास में अवैध वसूली करने वाले उस 'काली भेड़' पर कार्रवाई कब होगी?

क्या कॉलरी के बंद क्वार्टरों की जांच कर उन्हें सील किया जाएगा?

अब देखना यह है कि इस खबर के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर माफिया का यह 'अवैध साम्राज्य' यूं ही जनता का खून चूसता रहेगा।

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