शहडोल में UCC और लिव-इन रिलेशनशिप प्रावधानों के विरोध में जमीअत उलमा-ए-हिन्द कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
शहडोल। जमीअत उलमा-ए-हिन्द जिला इकाई शहडोल ने मध्य प्रदेश में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) एवं लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण संबंधी प्रावधानों का कड़ा विरोध करते हुए, कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन। संगठन ने कहा कि UCC संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता एवं मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप है।
ज्ञापन में कहा गया कि मुस्लिम समाज के निकाह, तलाक, विरासत, खुला एवं अन्य पारिवारिक मामलों का संचालन शरीयत और मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार होता है, जिनमें किसी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। जमीअत ने विशेष रूप से लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने और उसके अनिवार्य पंजीकरण का विरोध करते हुए इसे सामाजिक एवं धार्मिक मूल्यों के विरुद्ध बताया।
संगठन ने यह भी कहा कि प्रस्तावित UCC में आदिवासी समुदायों को छूट देने से समानता और एकरूपता का दावा कमजोर पड़ता है। जमीअत उलमा-ए-हिन्द ने मांग की कि मध्य प्रदेश में UCC लागू न किया जाए तथा सभी धार्मिक समुदायों के संवैधानिक एवं धार्मिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि इस संबंध में उचित निर्णय नहीं लिया गया तो व्यापक लोकतांत्रिक विरोध किया जाएगा।

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