शिक्षा की नींव पर भ्रष्टाचार का प्रहार, स्प्रिंग वैली स्कूल की बदहाली से भविष्य अंधकारमय
शहडोल। बुढ़ार: "अंधेर नगरी, चौपट राजा" की कहावत अक्सर सुनी जाती है, लेकिन सोहागपुर विकासखंड के हाथी डोल क्षेत्र में स्थित 'स्प्रिंग वैली स्कूल' इसे चरितार्थ करता नजर आ रहा है। एक ऐसा संस्थान जो बच्चों का भविष्य संवारने के लिए बनाया गया था, आज स्वयं अपनी ही कुव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार के दलदल में धंसा हुआ है। शासन के कड़े नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए इस विद्यालय का संचालन मनमाने तरीके से किया जा रहा है, जिससे न केवल छात्रों का भविष्य अधर में है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की गरिमा भी तार-तार हो रही है।
मनमानी का आलम: नियम-कानून ताक पर
शिक्षण संस्थानों के लिए शासन द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है। परंतु, स्प्रिंग वैली स्कूल में इन नियमों का कहीं भी अता-पता नहीं है। विद्यालय कक्षा 1 से 12वीं तक संचालित है, परंतु इसे चलाने का जो तरीका अपनाया गया है, वह किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान की श्रेणी में नहीं आता।प्राप्त जानकारी के अनुसार, यहाँ पढ़ाने वाले शिक्षक शासन द्वारा निर्धारित अर्हता नहीं रखते हैं। शिक्षा के अधिकार अधिनियम और विभागीय गाइडलाइंस के तहत शिक्षकों का प्रशिक्षित और योग्य होना अनिवार्य है, ताकि छात्रों को सही मार्गदर्शन मिल सके। लेकिन इस विद्यालय में अयोग्य शिक्षकों के माध्यम से अध्यापन कार्य कराया जा रहा है, जिसका सीधा असर छात्रों के शैक्षणिक स्तर पर पड़ रहा है।
खेल का मैदान या निजी वाटिका?
एक आदर्श विद्यालय परिसर में छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेल का मैदान होना अनिवार्य शर्त है। शासन की गाइडलाइंस के अनुसार, विद्यालय के पास पर्याप्त खुला स्थान होना चाहिए जहाँ बच्चे खेल सकें। लेकिन स्प्रिंग वैली स्कूल में बच्चों के खेलने के अधिकार को भी छीन लिया गया है। विद्यालय के जिस स्थान पर खेल का मैदान होना चाहिए था, वहां संचालक द्वारा 'गार्डन' बना दिया गया है।यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के साथ क्रूर मजाक भी है। जो स्थान छात्रों के सर्वांगीण विकास का केंद्र होना चाहिए था, वह अब संचालक की निजी पसंद का हिस्सा बन गया है। यह स्पष्ट करता है कि यहाँ प्रबंधन का ध्यान बच्चों के विकास पर नहीं, बल्कि अपनी मनमानी और दिखावे पर केंद्रित है। प्रशासनिक और
वित्तीय अनियमितताओं का गढ़
विद्यालय के भीतर भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि यहाँ किसी भी प्रकार का दस्तावेजी रिकॉर्ड ढंग से नहीं रखा जा रहा है। विद्यालय संचालन में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है, परंतु यहाँ स्थिति इसके विपरीत है स्कॉलरशिप रजिस्टर की अनदेखी शासन द्वारा छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति के लिए पारदर्शी रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। परंतु, स्प्रिंग वैली स्कूल में स्कॉलरशिप रजिस्टर तक का निर्माण नहीं किया गया है। यह गंभीर वित्तीय अनियमिता की ओर इशारा करता है। आखिर छात्रों का हक कहाँ जा रहा है और क्यों रजिस्टर गायब हैं? यह जांच का बड़ा विषय है।
दस्तावेजों का अभाव
अन्य आवश्यक प्रशासनिक रजिस्टर, जो एक मान्यता प्राप्त स्कूल की रीढ़ होते हैं, यहाँ नदारद हैं। बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड के विद्यालय चलाना यह दर्शाता है कि प्रबंधन पूरी तरह से 'अंधेर नगरी' की तर्ज पर काम कर रहा है, जहाँ जवाबदेही नाम की कोई चीज नहीं है।
संचालक और संलिप्त शिक्षकों का गठजोड़
इस पूरे प्रकरण में ओबेस अंसारी नामक शिक्षक की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों के अनुसार, संचालक की मनमानी में कुछ शिक्षकों की सीधी संलिप्तता है, जिनमें ओबेस अंसारी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। आरोप है कि ये शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता और शासन के नियमों की चिंता करने के बजाय, प्रबंधन के गलत फैसलों का समर्थन कर रहे हैं। छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बजाय, वे स्वयं को इस भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा बना चुके हैं।
अभिभावकों में आक्रोश, भविष्य अंधकारमय
विद्यालय की इस लचर व्यवस्था से अभिभावक बेहद परेशान और आक्रोशित हैं। अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा की उम्मीद में इस स्कूल में भेजने वाले अभिभावकों को अब महसूस हो रहा है कि उनके साथ धोखा हुआ है। एक ओर जहाँ भारी-भरकम फीस वसूली जा रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के नाम पर छात्रों को केवल उपेक्षा मिल रही है। खेल के मैदान का अभाव, अयोग्य शिक्षकों की फौज और दस्तावेजों का खेल, यह सब मिलकर छात्रों के भविष्य पर कुठाराघात कर रहे हैं। जो बच्चे आज इस विद्यालय में पढ़ रहे हैं, उनके मानसिक और शैक्षणिक विकास का क्या होगा? यह एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है जो स्थानीय शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है।
शिक्षा विभाग की चुप्पी क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है? सोहागपुर जैसे विकासखंड में संचालित इस विद्यालय की मनमानी आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रही है? क्या शिक्षा विभाग के निरीक्षक हाथी डोल स्थित इस विद्यालय की अनदेखी कर रहे हैं?यदि प्रशासन समय रहते नहीं जागा, तो यह "अंधेर नगरी" आने वाले समय में एक बड़े शैक्षिक घोटाले का रूप ले सकती है। छात्रों का भविष्य किसी की जागीर नहीं है, और इसे संचालक की मनमर्जी पर नहीं छोड़ा जा सकता।
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