45 हजार वसूलने के बाद भी नहीं साफ किया घाव
प्लास्टर के अंदर फंसा रहा संक्रमण, सीएमएचओ से निष्पक्ष जांच की मांग
शहडोल से जितेन्द्र विश्वकर्मा की रिपोर्ट
शहडोल। निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर भारी-भरकम फीस चुकाने के बाद भी मरीजों को राहत मिले या न मिले, लेकिन नई आफत मिलना लगभग तय माना जाने लगा है। ऐसा ही गंभीर मामला जिला मुख्यालय स्थित आदित्य हॉस्पिटल से सामने आया है, जहां उपचार में लापरवाही और अत्यधिक शुल्क वसूली का आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य विभाग का दरवाजा खटखटाया गया है। पीडि़त पक्ष ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई की गुहार लगाई है।
घाव गंदा, ऊपर से बांध दिया प्लास्टर
सीएमएचओ को सौंपी गई शिकायत के अनुसार राजेंद्र कॉलोनी (सिरौंजा) निवासी मरीज सत्यम उपाध्याय को हड्डी फ्रैक्चर और शरीर पर घाव होने की स्थिति में इलाज के लिए आदित्य हॉस्पिटल शहडोल में भर्ती कराया गया था। शिकायतकर्ता दीपाली उपाध्याय (मरीज की मां) का आरोप है कि अस्पताल के संबंधित डॉक्टरों ने मरीज की टूटी हड्डी को तो बैठाया, लेकिन घाव की उचित रूप से साफ-सफाई और आवश्यक प्राथमिक उपचार किए बिना ही जल्दबाजी में ऊपर से प्लास्टर बांध दिया। डॉक्टरों की इस कथित लापरवाही का खामियाजा मरीज को असहनीय दर्द के रूप में भुगतना पड़ा। प्लास्टर के अंदर ही अंदर घाव में गंभीर संक्रमण फैल गया और उसमें भारी मात्रा में पस (रुप/मवाद) भर गई, जिससे मरीज की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई।
बिगड़ी हालत तो बुढ़ार में बची जान
आरोप यह भी है कि इलाज की गुणवत्ता में भले ही भारी कमी रही हो, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने अपनी जेब भरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आरोप के मुताबिक, इलाज के पहले ही दिन अस्पताल द्वारा परिजनों से लगभग 45,000 रुपये की भारी-भरकम राशि वसूल कर ली गई। जब मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर और चिंताजनक होने लगी, तब घबराए परिजन मरीज को लेकर स्वास्तिक हॉस्पिटल बुढ़ार पहुंचे। वहां कार्यरत डॉ. आर. सी. जैन को जब मरीज दिखाया गया, तो उन्होंने तत्काल स्थिति की गंभीरता को समझते हुए प्लास्टर काटा। प्लास्टर कटते ही अंदर से बड़ी मात्रा में पस निकली। इसके बाद जब घाव की सफाई कर नया उपचार शुरू किया गया, तब कहीं जाकर मरीज की स्थिति में सुधार आया और उसकी जान बच सकी।
निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
29 जुलाई को दर्ज कराई गई इस आधिकारिक शिकायत के माध्यम से आवेदिका दीपाली उपाध्याय ने स्वास्थ्य प्रशासन से मांग की है कि आदित्य हॉस्पिटल के संबंधित डॉक्टरों और प्रबंधन की इस कथित लापरवाही की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही दोषियों पर आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य असहाय मरीज और उसके परिवार को इस तरह के भयावह मानसिक और शारीरिक कष्ट से न गुजरना पड़े।
अस्पताल संचालक
जब इस संबंध में अस्पताल संचालक से जानकारी लेने के लिए फोन से संपर्क साधा गया। उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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