सिंहपुर के पंचमठा काली मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, चुनरी चढ़ाकर भक्तों ने मांगी मनोकामना
शहडोल। नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर शहडोल जिले के सिंहपुर स्थित पंचमठा काली मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। नवरात्रि की पंचमी तिथि पर बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन करने पहुंचे और चुनरी चढ़ाकर सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से चुनरी चढ़ाने और माता से प्रार्थना करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का केंद्र है पंचमठा मंदिर
पंचमठा मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राचीन स्थापत्य कला और ऐतिहासिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, यह दो मंजिला शिव मंदिर 17वीं-18वीं शताब्दी में गोंड राजाओं के शासनकाल में निर्मित हुआ था। मंदिर का बाहरी और ऊपरी भाग अपेक्षाकृत सादा है, जिसमें पतली ईंटों, अनगढ़े पत्थरों और अलंकृत प्रस्तर शिलाओं का उपयोग किया गया है।
मंदिर परिसर और आसपास के प्राचीन धार्मिक स्थलों के अवशेष इसकी ऐतिहासिक महत्ता को बढ़ाते हैं। समीपस्थ अंतरा स्थित चामुंडा देवी (कंकाली) मंदिर के ध्वस्तावशेषों से प्राप्त प्राचीन प्रतिमाएं और स्थापत्य खंड यहां की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। इनमें विष्णु मंदिर का अलंकृत द्वार-तोरण, भगवान विष्णु की प्रतिमाएं, जैन देवी तथा अंजलिबद्ध गरुड़ की प्रतिमाएं उल्लेखनीय हैं।
प्राचीन शिल्पकला का अनूठा उदाहरण
आयताकार संरचना वाले इस मंदिर के चारों कोनों पर उपमंदिर बनाए गए थे, जिनमें से एक नष्ट हो चुका है। शेष उपमंदिरों में प्राचीन मंदिरों के अलंकृत प्रस्तर खंड और कलात्मक स्तंभों के अवशेष देखे जा सकते हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर नवग्रह, भगवान विष्णु, ब्रह्मा, शिव, देवी गंगा-यमुना तथा अन्य देवी-देवताओं से संबंधित कलात्मक प्रतिमाएं इसकी स्थापत्य विशेषताओं को उजागर करती हैं।
नवरात्रि के दौरान मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ क्षेत्र की धार्मिक आस्था को दर्शाती है। पंचमठा मंदिर आज भी श्रद्धा, परंपरा और ऐतिहासिक धरोहर के संगम के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।
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