शहडोल:तेंदूपत्ता संग्राहकों के बच्चों की शिक्षा को मिल रहा प्रोत्साहन, छात्रवृत्ति से खुल रहे आगे बढ़ने के अवसर

शहडोल जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़ी योजनाओं के साथ विद्यार्थियों की शिक्षा पर भी जोर, पात्र विद्यार्थियों को नियमानुसार छात्रवृत्ति का लाभ

शहडोल।  जिले के आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीण परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। इस कार्य से प्राप्त आय परिवारों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है। इसके साथ ही तेंदूपत्ता संग्राहकों के पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं के माध्यम से शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने की व्यवस्था भी है। इससे विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

तेंदूपत्ता संग्रहण से आय, शिक्षा के लिए भी सहारा

तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान ग्रामीण परिवार मेहनत से पत्तों की तुड़ाई कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संग्रहण केंद्रों पर जमा करते हैं। इसके बदले उन्हें नियमानुसार पारिश्रमिक प्राप्त होता है। संग्रहण से होने वाली आय परिवारों की दैनिक जरूरतों के साथ बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने में भी सहायक होती है।

वन आधारित आजीविका से जुड़े परिवारों के विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहन देने के लिए पात्रता के आधार पर छात्रवृत्ति का लाभ दिया जाता है। इससे आर्थिक परिस्थितियों के बीच विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में सहयोग मिलता है।

पात्र विद्यार्थियों को एकलव्य शिक्षा छात्रवृत्ति का लाभ

दक्षिण वन मंडल शहडोल की वनमंडलाधिकारी श्रद्धा पेन्द्रे ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के पात्र बच्चों को एकलव्य शिक्षा छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत लाभ दिया जाता है।

योजना के अंतर्गत पात्रता के लिए पिछले पांच वर्षों में कम से कम तीन वर्षों तक प्रत्येक वर्ष एक-एक मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण से संबंधित शर्त तथा विद्यार्थियों के अंकों की शर्त निर्धारित है। कक्षा 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के साथ महाविद्यालय में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थियों को भी योजना का लाभ दिया जाता है।

विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2024-25 में शहडोल जिले के 130 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति वितरण के लिए 18 लाख 35 हजार रुपये की राशि आवंटित की गई। उत्तर एवं दक्षिण शहडोल सहित उमरिया, अनूपपुर, सतना और सीधी के छह वनमंडलों के लिए इसी अवधि में 362 छात्र-छात्राओं को कुल 25 लाख 27 हजार रुपये आवंटित किए गए।

छात्रवृत्ति की अधिकतम राशि निर्धारित

शिक्षण सत्र 2022-23 से एकलव्य शिक्षा छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों के विद्यार्थियों के लिए अधिकतम निर्धारित छात्रवृत्ति राशि इस प्रकार है। कक्षा 9वीं एवं 10वीं: अधिकतम 15 हजार रुपये,  कक्षा 12वीं: अधिकतम 18 हजार रुपये। गैर-तकनीकी स्नातक उपाधि के लिए अध्ययनरत विद्यार्थी: अधिकतम 25 हजार रुपये। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थी: अधिकतम 60 हजार रुपये निर्धारित है।

छात्रवृत्ति का वास्तविक लाभ योजना की पात्रता और निर्धारित नियमों के अनुसार दिया जाता है। इस व्यवस्था से पात्र विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहयोग मिलता है।

गांवों के विकास के साथ नई पीढ़ी की शिक्षा पर जोर

तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े लाभों में पारिश्रमिक के अतिरिक्त नियमानुसार बोनस तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए सहायता की व्यवस्था भी शामिल है। गांवों में सड़क, चौपाल, प्रतीक्षालय और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का विकास ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देता है।

इसके साथ ही विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने वाली योजनाएं ग्रामीण परिवारों की नई पीढ़ी के लिए आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

शिक्षा से मजबूत होगा ग्रामीण परिवारों का भविष्य

तेंदूपत्ता संग्राहकों के परिवारों के लिए आजीविका और शिक्षा दोनों महत्वपूर्ण हैं। जहां संग्रहण से प्राप्त आय परिवार की वर्तमान जरूरतों को पूरा करने में सहायता करती है, वहीं शिक्षा बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने का आधार तैयार करती है।

पात्र विद्यार्थियों को योजनाओं की सही जानकारी उपलब्ध कराना, समय पर आवेदन करने के लिए प्रेरित करना और आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में मार्गदर्शन देना महत्वपूर्ण है। इससे अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं और शिक्षा के माध्यम से अपने परिवार तथा क्षेत्र की प्रगति में योगदान दे सकते हैं।


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